Wednesday, November 20, 2013

the swan song...


4 comments:

  1. कौन कहता है कि अंत अनंत होता है,
    हर आदि का आगाज़ इक अंत होता है.
    ठहर जाएँ अश्क ग़र पलकों पर,
    लम्हा वो बड़ा ही ज्वलंत होता है.
    पराकाष्ठा होती है; जब ख्वाहिशों की,
    प्रवाह आँखों से स्वछंद होता है.
    देखो गौर से बहते अवसादों को,
    गुलिस्तां उन्ही से उनसे आरम्भ होता है.
    कभी महसूस किया है; फैली हरियाली में,
    तम के साथ तरावट का द्वन्द रहता है.
    कुछ नया खिलता है, पुराने के जाने से,
    सृजन का यही अटूट नियम होता है.
    यादों में बंध कर, ज़िंदगी को खाक़ करें,
    कहीं ये भी जीने का ढंग होता है?

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    1. Amit@ your right… the end is the beginning of something… yet end is not the end… :D

      This is again abstraction of a gazal by Jagjit and Chitra… we will talk about it at length :D

      Keep writing :D:D:D

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  2. Awesome lines... awesome.
    Aisa lag raha hai ki poem ke colors to poetry main aa gaye hai :-)

    The best lines -
    "कुछ नया खिलता है, पुराने के जाने से,
    सृजन का यही अटूट नियम होता है."

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